जल संसाधन में वर्षा जल की भूमिका
पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवन का मुख्य आधार जल, प्रचुरता में मिलने वाला एक दुर्लभ संसाधन है। इसलिए कहा गया है कि “जल है तो कल है”।
भूमिगत जल के प्रकार:- भूमिगत जल की हम सीमित मात्रा ही उपयोग कर सकते हैं अन्यथा यह पर्यावरणीय संकट को जन्म देगा जबकि सतही जल की दो तिहाई से अधिक मात्रा नदियों में उपलब्ध है जिसे नदियां प्रत्येक वर्ष सागर में विसर्जित कर देती हैं। इसलिए कहा गया है कि जल प्रचुरता में मिलने वाला एक दुर्लभ संसाधन है। भारत में प्रत्येक वर्ष वर्षा जल के माध्यम से लगभग 4000 घन किलोमीटर जल उपलब्ध होता है जिसकी तीन चौथाई मात्रा सतही जल के रूप में होती है जबकि एक चौथाई मात्रा भूमिगत जल में होती है।
वर्षा जल के 4000 घन किलोमीटर जल में से 1800 घन किलोमीटर जल नदियां प्रवाहित करती हैं जो कि समुद्र में विसर्जित हो जाती है और प्रत्येक वर्ष 1200 घन किलोमीटर जल का वाष्पोत्सर्जन हो जाता है। बचे 1000 घन किलोमीटर जल में से 600 घन किलोमीटर जल मृदा जल एवं 400 घन किलोमीटर जल भूमिगत जल होगा। अतः उपर्युक्त से यह स्पष्ट है की जल प्रचुरता में मिलने वाला एक दुर्लभ संसाधन है। इसलिए हमें इसका दोहन सोच-समझ कर सीमित मात्रा में करना चाहिए अन्यथा पारिस्थितिकी संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।